गुजरात के भ्रष्ट अधिकारियों की नई चाल: रिश्वत अब किश्तों में!
गुजरात के भ्रष्ट अधिकारियों ने रिश्वत लेने का एक नया तरीका खोज निकाला है जिससे लोगों पर एक साथ बोझ न पड़े। जानिए कैसे ये अधिकारी अब ईएमआई में रिश्वत लेकर बना रहे हैं लोगों को निशाना।
जब लोग घर, गाड़ी या फिर दूसरे सामान को खरीदने की चाह रखते हैं और उनका बजट ना हों तो वो उस सामान को ईएमआई यानी किश्तों में खरीद लेते हैं. यही वजह है कि देशभर में बड़ी कंपनियों के ज्यादातर प्रोडक्ट्स ईएमआई फेसिलिटी पर उपलब्ध रहते हैं. क्रेडिट कार्ड का तो ज्यादातर बिजनेस ईएमआई से जुड़ा है. लेकिन अगर कोई आपसे कहे कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी रिश्वत लेने के लिए लोगों को ईएमआई की सुविधा दे रहे हैं तो यकीनन हर कोई हैरान रह जाएगा.
लोगों पर न पड़े बोझ, इसलिए किश्तों में ली जा रही रिश्वत
इन दिनों ऐसा ही अजीबोगरीब मामला गुजरात से सामने आया है. गुजरात के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने ईएमआई में रिश्वत लेने का तरीका इसलिए चुना ताकि लोगों पर एक साथ ज्यादा बोझ ना पड़े, जिनसे वो रिश्वत ले रहे हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि लोग भ्रष्ट्र अधिकारियों को ईएमआई यानी किश्तों में रिश्वत दे भी रहे हैं. गुजरात में ईएमआई के रूप में रिश्वत लेने के ऐसे ही कई मामले सामने आए हैं. दरअसल इस साल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा ऐसे दस मामले दर्ज किये गए हैं.
खेत समतल करने के लिए किश्तों में रिश्वत
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक 4 अप्रैल को सूरत में एक ग्रामीण के खेत को समतल करने के लिए 85,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई. ग्रामीण की आर्थिक स्थिति को देखते हुए, उसके सामने रिश्वत की रकम को ईएमआई के रूप में चुकाने का विकल्प रखा गया. जिसमें पहले 35,000 रुपये की रकम और बाकी बची हुई रकम को तीन बराबर किश्तों में भुगतान करने की बात कही गई.
रिश्वत की पहली किश्त लेकर पुलिस वाले फरार
दो पुलिसकर्मी साबरकांठा निवासी से मांगे गए 4 लाख रुपये लेकर भाग गए, दरअसल यह राशि उनके द्वारा मांगे गए कुल 10 लाख रुपये की पहली किस्त थी. एक अन्य मामले में, साइबर क्राइम पुलिस अधिकारी ने मांगे गए 10 लाख रुपये को चार किस्तों में बांट दिया. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारियों का कहना है कि किश्तों में रिश्वत लेने की प्रथा बढ़ रही है और इस साल अकेले ऐसे दस मामले सामने आए हैं.

